हमारे बारे में
न्यायिक ज्वाला के संस्थापक स्वर्गीय दुर्गाप्रसाद शर्मा न्यायिक सेवा के कर्मचारी के अलावा न्यायिक कर्मचारी यूनियन से भी सम्बद्ध रहे और उन्होने न्यायिक क्षेत्र की कमियों के विरुद्ध आवाज बुलन्द करने के लिये इस समाचार पत्र का प्रकाशन करने का निश्चय किया । इस अभियान को आगे बढाते हुये वर्ष २००३ में ’न्यायिक ज्वाला’ पाक्षिक का विधिवत पंजीकरण करवाकर न्यायिक व्यवस्था में फ़ैले अंधकार को दूर करने के लिये एक दीप प्रज्वल्लित किया । न्यायपालिका मे भ्रष्टाचार, न्यायाधीशों का चयन एवं न्यायाधीशों की जवाबदेही तय करने के लिये आपने इस अभियान मे निरन्तर नये आयाम स्थापित किये । आपने इस अभियान मे उन लोंगो को शामिल करने का आवाह्न किया जो वर्तमान न्याय व्यवस्था से पीडित थे या इस अभियान मे शामिल होना चाह्ते थे ।
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श्रीगोपाल शर्मा भी न्याय व्यवस्था पर दैनिक समाचार पत्रों में कालम लिखते थे और न्याय व्यवस्था में सुधार के लिये प्रयासरत थे । इस क्रम मे वे स्वर्गीय दुर्गाप्रसाद जी के संपर्क में आये और इस अभियान से जुड गये । दुर्भाग्यवश वर्ष २००५ में श्री दुर्गाप्रसाद जी का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया और उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप इस न्यायिक ज्वाला के दीप को निरन्तर जलाये रखने का दायित्व श्रीगोपाल शर्मा को हस्तान्तरित कर दिया गया । तब से यह पत्र उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति के लिये सतत प्रयत्नशील है । |
न्यायिक ज्वाला का प्रथम संस्करण १० जून २००३ को प्रकाशित हुआ । तबसे न्यायिक ज्वाला का निरन्तर पाक्षिक प्रकाशन हो रहा है । न्यायिक व्यवस्था में फ़ैले अंधकार को दूर भगाने के लिये चलाया जा रहा एक अभियान है ’न्यायिक ज्वाला’! जिसमें निम्नलिखित सेवानिवृत न्यायाधीशों एवं सेवानिवृत वरिष्ठ अधिकारियों ने भी परामर्श मंडल में शामिल होने की स्वीकृति प्रदान की है ।
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परामर्श मंडल |
सम्पादक मंडल |
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श्री जे पी बंसल - सेवानिवृत न्यायाधीश |
श्री गोपाल शर्मा - प्रधान सम्पादक श्री सुधीर शर्मा - सम्पादक श्री गोविन्द मिश्रा - सहसम्पादक श्री सुरेश अग्रवाल - सहसम्पादक |
